उत्तर प्रदेश के सीतापुर में कांग्रेस को कार्यालय खाली करना होगा। नगर पालिका ने कांग्रेस को दफ्तर खाली करने के लिए 15 दिन का समय था। नगर पालिका के आदेश को कांग्रेस ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में चुनौती दी और स्टे लगाने की मांग की। हाई कोर्ट ने कांग्रेस नगर अध्यक्ष की अपील खारिज कर दी और बेदखली आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। साल 1971 से इस कार्यालय पर कांग्रेस का कब्जा है। आरोप है कि कांग्रेस ने पिछले 55 सालों से एक भी रुपये किराया जमा नहीं किया है। नजूल की जमीन पर बिना आवंटन के यह कार्यालय चल रहा था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि सरकारी ज़मीन पर लंबे समय से कब्ज़ा होने से वह कब्ज़ा कानूनी नहीं हो जाता। साथ ही, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई अलॉटमेंट ऑर्डर या दूसरा दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाए जिससे यह साबित हो सके कि प्रॉपर्टी उन्हें कानूनी तौर पर अलॉट की गई थी।
कांग्रेस ने हाई कोर्ट में दी थी चुनौती
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की बेंच ने कांग्रेस कमेटी, सीतापुर की ओर से दायर रिट याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में नगर पालिका परिषद, सीतापुर के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (इन-चार्ज) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें टैमसेन गंज इलाके में प्लॉट नंबर 244/1 से जुड़े रिकॉर्ड से याचिकाकर्ताओं के नाम हटाने और उन्हें प्रॉपर्टी से बेदखल करने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं का दावा था कि 1971 से सीतापुर में घंटा घर के ऊपरी हिस्से पर उनका कब्ज़ा था और उन्होंने 1971 में 320 रुपये किराया चुकाने की रसीद भी पेश की। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि पिछले 55 सालों से कोई किराया नहीं दिया गया था और याचिकाकर्ता ऐसा कोई एग्रीमेंट, अलॉटमेंट लेटर या दूसरा दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाए जिससे प्रॉपर्टी के कानूनी अलॉटमेंट या कब्ज़े की पुष्टि हो सके। राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि प्रॉपर्टी 'नज़ूल' ज़मीन थी और उस पर कब्ज़ा गैर-कानूनी था।
कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी कांग्रेस
कोर्ट ने कहा कि भले ही कब्ज़ा दशकों पहले शुरू हुआ हो, लेकिन सरकारी प्रॉपर्टी पर ऐसे कब्ज़े को कानूनी मान्यता तभी मिल सकती है जब उसके समर्थन में कोई अलॉटमेंट ऑर्डर या कानूनी कब्ज़े का सबूत देने वाला कोई दूसरा दस्तावेज़ हो। इस तरह, बेंच ने अंतरिम राहत की अर्ज़ी खारिज कर दी और प्रतिवादियों को तीन हफ़्ते के भीतर अपना जवाबी हलफ़नामा (counter-affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ़्ते का समय मिलेगा।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, शहर कांग्रेस कमेटी का कार्यालय घंटाघर की ऐतिहासिक बिल्डिंग की पहली मंजिल पर संचालित किया जा रहा है। यह कार्यालय नजूल भूखंड 244/1 बना है। इसे लेकर नगर पालिका परिषद सीतापुर की प्रभारी ईओ सीमा सिंह ने एक नोटिस जारी करते हुए शहर कांग्रेस कमेटी को उक्त कार्यालय खाली करने को कहा। जिसका जवाब देते हुए शहर कांग्रेस कमेटी के नगर अध्यक्ष ने अपना जवाब देते हुए नगर पालिका को अवगत कराया की 1972 से किराएदारी और तत्कालीन सरकार द्वारा उन्हें कार्यालय आवंटन किया गया है। लेकिन नगर पालिका ने इस जवाब को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि कांग्रेस ने आखिरी बार 6 फरवरी 1971 में मात्र 320 रुपए जमा कराए थे। शहर कांग्रेस कमेटी द्वारा जो दावे पेश किए गए थे, उसका नगर पालिका परिषद सीतापुर में कोई भी अभिलेख मौजूद नहीं मिला। देखा जाए तो पिछले 55 सालों से शहर कांग्रेस कमेटी ने किराया भी नहीं जमा किया है।
रिपोर्ट- मोहित मिश्र, सीतापुर (पीटीआई इनपुट के साथ)